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माघी अमावस्या: धर्म और आध्यात्मिक महत्व, जानिए पूजा विधि और शुभ कार्य Mauni Amavasya On Auspicious Sunday
उज्जैन।
News20Express की रिपोर्ट के अनुसार, इस रविवार, 18 जनवरी को माघ मास की अमावस्या है, जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है।
रविवार को होने वाली अमावस्या का अत्यधिक महत्व माना जाता है।
इस तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध करने, गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने के साथ ही शनिदेव और पीपल के पेड़ की पूजा करने की परंपरा है।
मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर पूजा-पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा बताते हैं कि माघी अमावस्या के संबंध में यह मान्यता है कि इस दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था और मनु शब्द से ही इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है।
मनु ऋषि को ब्रह्मा जी का मानस पुत्र माना जाता है।
इस दिन अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध-तर्पण करने और दान-पुण्य करने से उन्हें तृप्ति मिलती है।
पितर देव अपने परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद देते हैं, जिससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
इस दिन धर्म कर्म करने से पुण्य मिलता है।
माघी अमावस्या के दिन अनेक तीर्थ स्थलों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जहाँ वे पवित्र नदियों में स्नान करके देवता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इस प्रकार, माघी अमावस्या एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर है, जो धर्म, आस्था और परंपराओं का संगम है।
- माघी अमावस्या 18 जनवरी को, मौनी अमावस्या के रूप में भी जानी जाती है।
- पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के लिए श्राद्ध करने का विशेष महत्व।
- शनिदेव और पीपल की पूजा के साथ दान-पुण्य करने से मिलता है लाभ।
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Posted on 16 January 2026 | Follow News20Express.com for the latest updates.