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पर्यावरण संकट: क्या नेता वोट बैंक की राजनीति में व्यस्त हैं? | राजनीति Environmental Change Costs Dearly
News20Express की रिपोर्ट के अनुसार, देश में पर्यावरण परिवर्तन एक गंभीर चुनौती बन गया है, जिसका खामियाजा हर साल हजारों लोगों की जान और अरबों रुपयों के नुकसान से चुकाना पड़ता है।
लेकिन, चिंता की बात यह है कि हमारे नेता और राजनीतिक दल इस गंभीर समस्या को लेकर गंभीर दिखाई नहीं देते।
वोट बैंक की राजनीति इस गंभीर मुद्दे पर हावी होती दिख रही है।
केंद्र और राज्य सरकारों के लिए भी यह समस्या प्राथमिक सूची में शामिल नहीं है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में देश के विभिन्न हिस्सों में आपदाओं ने भारी तबाही मचाई, जिसमें सैकड़ों आम नागरिकों की जान चली गई।
पिछले साल, प्राकृतिक आपदाओं के कारण देश में 2700 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं, जबकि मध्य प्रदेश आपदा से हुई मौतों के मामले में दूसरे स्थान पर रहा।
बिहार में आंधी-तूफान और बिजली गिरने से सबसे ज्यादा लोगों की जान गई।
उत्तर-पश्चिम भारत, विशेष रूप से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं ने भारी विनाश किया।
यह स्थिति तब है, जब 1901 के बाद पिछले 124 वर्षों में तीसरी सबसे अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।
क्या हमारी राजनीति और हमारे नेता इस गंभीर समस्या को समझेंगे और ठोस कदम उठाएंगे? क्या **कांग्रेस** और **बीजेपी** जैसी पार्टियां **चुनाव** में इस मुद्दे को उठाएंगी? यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या भविष्य में **नेता** इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस नीतियां बनाएंगे।
**राजनीति** में पर्यावरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनना चाहिए।
- पर्यावरण परिवर्तन से हर साल हजारों लोगों की जान जा रही है।
- वोट बैंक की राजनीति के कारण नेता गंभीर नहीं दिख रहे।
- उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें, मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा।
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Posted on 20 January 2026 | Stay updated with News20Express.com for more news.