Faith focus:
नारद मुनि का अभिमान भंग! विष्णु लीला से कुरूप, क्या हुआ आगे? | धर्म Narada Misunderstands Vishnu's Divine Nature
News20Express की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीहरि के वचनों से उत्साहित नारद मुनि अपनी ही दुनिया में खोए हुए थे, मानो उनके समक्ष साक्षात नारायण नहीं, बल्कि कोई बलि का बकरा हो।
वे भगवान विष्णु को केवल अपना काम साधने का एक जरिया मान रहे थे।
भगवान विष्णु ने नारद मुनि को विश्वमोहिनी के मोह से बचाने के लिए एक लीला रची।
उन्होंने कहा कि जैसे एक रोगी कुपथ मांगे तो वैद्य उसे नहीं देता, उसी प्रकार मैंने भी तुम्हारा हित चाहा है।
यह कहकर भगवान विष्णु अंतर्ध्यान हो गए।
इस घटना के बाद नारद मुनि के साथ जो हुआ, वह उनके अभिमान को चूर-चूर करने वाला था।
भगवान विष्णु की माया से नारद मुनि कुरूप हो गए।
जब वे इस रूप में शिवगणों के सामने आए, तो उन्होंने नारद मुनि का खूब मजाक उड़ाया।
नारद मुनि को अपनी भूल का अहसास हुआ और वे समझ गए कि भगवान विष्णु ने उन्हें किस मोह से बचाने की कोशिश की थी।
इस घटना ने नारद मुनि को एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया और उनके आध्यात्मिक पथ को और भी मजबूत किया।
यह कथा धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक प्रेरणा है, जो हमें अहंकार से दूर रहने और भगवान की लीला को समझने की प्रेरणा देती है।
इस घटना का वर्णन कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है और यह भक्तों के बीच आज भी प्रचलित है।
- भगवान विष्णु ने नारद मुनि का अभिमान तोड़ा।
- कुरूप होने पर शिवगणों ने नारद मुनि का उड़ाया मजाक।
- नारद मुनि को मिला अहंकार त्यागने का सन्देश।
Related: Technology Trends
Posted on 28 December 2025 | Check News20Express.com for more coverage.