सतनबाड़ा के डोंगर में बाघिन ने किया ग्रामीण पर हमला, नेशनल पार्क व फॉरेस्ट की टीमें पहुंचीं

 सतनबाड़ा के डोंगर में बाघिन ने किया ग्रामीण पर हमला, नेशनल पार्क व फॉरेस्ट की टीमें पहुंचीं



 

नरवर रोड के ग्राम चाड से होकर डोंगर पहुंची बांधवगण से लाई गई बाघिन, ढूंढ रही अपना ठिकाना

शिवपुरी। माधव टाइगर रिज़्व में बीते 27 दिसंबर को छोड़ी गई बांधवगढ़ की बाघिन ने नए वर्ष की सुबह सतनबाड़ा के डोंगर गांव में खेत पर एक ग्रामीण पर हमला कर दिया। हालांकि हमला पैर पर किया है, इसलिए ग्रामीण की हालत तो ठीक है, लेकिन दहशत अधिक है। सूचना मिलने पर नेशनल पार्क और सामान्य वन मंडल की टीम गांव में पहुंच गई। 

बीते 27 दिसंबर की सुबह बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन को शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। इस बाघिन को अभी तक अपना ठिकाना नहीं मिल पाया, इसलिए वो जंगल में भटकती हुई गांव की आबादी तक पहुंच रही है। 31 दिसंबर को यह बाघिन नरवर रोड पर स्थित चाड गांव में पहुंच गई थी, जिसकी सूचना जब ग्रामीणों। ने बन विभाग को दी, तो सतनबाड़ा रेंजर माधव सिंह सिकरवार अपनी टीम के साथ गांव में पहुंचे थे। 

रात में यह बाघिन जंगल के रास्ते से होकर डोगर गांव में पहुंच गई। आज सुबह 7 बजे जब गांव में रहने वाला शिवलाल बघेल (55) अपने खेत के पास खुले में शौच कर रहा था, तभी बाघिन ने उसके पैर के पंजे पर हमला कर दिया। चूंकि शिवलाल जूते पहने हुए था, इसलिए बाघिन का हमला गहरा जख्म नहीं दे पाया।ग्रामीण के चिल्लाने पर बाघिन वापस जंगल में भाग गई, तथा ग्रामीणों की भीड़ इकठ्ठा हो गई। बाघिन के गांव में आ जाने की खबर से न केवल डोंगर बल्कि आसपास के गांव में भी दहशत हो गई। चूंकि बाघिन ने इंसान पर हमला किया है, इसलिए ग्रामीणों की चिंता अधिक है, क्योंकि यदि टाइगर आदमखोर हो गया, तो इंसानों की जान को बड़ा खतरा बन जाता है। 

नए जंगल में ठिकाना ढूंढ रही बाघिन

चार दिन पहले बांधवगढ़ से लाकर माधव टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन अभी तक नए जंगल में अपना ठिकाना नहीं बना पाई। चूंकि शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में जंगल के बीच भी गांव बसे हुए हैं, इसलिए बाघिन लगातार जंगल में भटक रही है। अभी तक उसे जंगल में शायद दूसरा टाइगर नहीं मिला है, इसलिए वो एक जगह रुक नहीं पा रही। 

पर्यटन के साथ आमजन को खतरा

शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में टाइगरों के आने के बाद पर्यटकों की संख्या में तो इजाफा हुआ है, लेकिन साथ में आमजन की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया। टाइगरों के जंगल में बढ़ने से तेंदुए इधर-उधर भाग रहे हैं, और अब टाइगर भी जब गांव की तरफ बढ़ने के साथ ही इंसानों पर हमला कर रहे हैं, तो फिर कहीं न कहीं भविष्य में जंगल के बीच व उसके आसपास बसे गांव के लोगों को खतरा भी बढ़ गया है।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने