ग्वालियर | केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए शहर के विकास, चौथे स्तंभ की भूमिका और आईएसबीटी (इंटर स्टेट बस टर्मिनल) को लेकर उठ रहे सवालों पर स्पष्ट और संतुलित दृष्टिकोण रखा।
उन्होंने कहा कि चौथा स्तंभ बंद होने का अर्थ केवल नकारात्मक घटनाओं या कमियों को बार-बार उजागर करना नहीं है, बल्कि जहां प्रगति और सकारात्मक कार्य हुए हैं, उनकी भी निष्पक्ष चर्चा होनी चाहिए। “जिस छत के नीचे हम खड़े हैं, उसकी मजबूती की बात भी उतनी ही ज़रूरी है,” उन्होंने कहा।
आईएसबीटी के संदर्भ में मंत्री सिंधिया ने बताया कि इसके पीछे शहर के दीर्घकालिक विकास की सोच है। जैसे अतीत में माधव महाराज द्वारा रेल, सड़कें और बांध भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, वैसे ही आईएसबीटी केवल आज के ग्वालियर के लिए नहीं, बल्कि अगले 25–50 वर्षों के लिए तैयार किया गया है।
उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में आईएसबीटी तक पहुंचने में लोगों को किराया देना पड़ रहा है, जिससे कुछ असुविधा महसूस हो रही है। इसी समस्या के समाधान के लिए ई-बस सेवा लाने पर विचार किया जा रहा है। मंत्री ने विश्वास जताया कि अप्रैल माह में ग्वालियर को ई-बस का कोटा मिलने की संभावना है, जिससे शहर के केंद्र से आईएसबीटी तक आवागमन और अधिक सुगम होगा।
मंत्री सिंधिया ने स्पष्ट किया कि आईएसबीटी पूरी तरह तैयार है और संचालन के लिए सक्षम है। बसों की कोई कमी नहीं है और प्रशासन द्वारा बसों का संचालन भी शुरू किया जा चुका है। “केवल थोड़े समय की आवश्यकता है, ताकि लोग नई व्यवस्था के अनुरूप ढल सकें,” उन्होंने कहा।
अंत में उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता की सुविधा सर्वोपरि है और सभी अस्थायी कठिनाइयों का समाधान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

